Friday, September 29, 2006

इंकलाब जिंदाबाद। साम्राज्‍यवाद का नाश हो।

भगत सिंह के सपनों को लेकर आगे बढ़ें

दोस्‍तो

2006-2007 शहीदे आजम भग‍त सिंह की जन्‍म शताब्‍दी का साल है। भगत सिंह के जन्‍मदिन 28 सितम्‍बर 2006 से यह शताब्‍दी वर्ष शुरू होकर अगले साल तक चलेगा। देश में ही नहीं पूरी दुनिया में जहां भी स्‍वातंत्र्यकामी, जनतंत्र प्रेमी लोग हैं, वे इस पूरे वर्ष भगत सिंह जन्‍म शताब्‍दी धूमधाम से मनायेंगे।

पटना में यह आयोजन शुरू भी हो चुका है। लगातार कार्यक्रम हो रहे हैं जिसमें बड़े पैमाने पर स्‍कूली विद्यार्थी, आमजन, विभिन्‍न सामाजिक समूहों के साथ काम करने वाले जन संगठन, साहित्‍यकार, बुद्धिजीवी शामिल हैं।

23 साल की उम्र में साम्राज्‍यवाद को चुनौती देते हुए राजगुरु- सुखदेव के साथ 'इंकलाब ज़िंदाबाद' का नारा बुलंद करते हुए भगत सिंह फांसी के तख़्ते पर चढ़े। उनके वे नारे आज भी गूंज रहे हैं। साम्राज्‍यवाद और भी विकट रूप में हमारे सामने खड़ा है और भगत‍ सिंह की आजादी के सपने को लीलने को तैयार है। ऐसे में इस जन्‍म शताब्‍दी वर्ष का एक खास महत्‍व है। यह भगत सिंह और उनके क्रांतिकारी साथियों के हौसलों को याद करने का समय है, जवानी के वे हौसले जो सत्‍ता के दमन के सामने बुलंद रहे, वे सपने जो भविष्‍य में भारत को सबसे न्‍यायपूर्ण देश के रूप में देखने से जुड़े हैं, वे जज़्बात जो ग़रीबों-मेहनतकशों के लिए दिलों में धड़कते रहे। यह उन हौसलों-सपनों-धड़कनों को जज़्ब करने का वर्ष बन जाना चाहिए।

दोस्‍तो, भगत सिंह और उनके साथियों को गोरों की गुलामी से मुक्ति प्राप्‍त कर भूरों या कालों की गुलामी मंजूर नहीं थी। उन्‍होंने मानव द्वारा मानव का शोषण करने वाली व्‍यवस्‍था को ध्‍वस्‍त कर नए समाजवादी समाज की रचना का सपना आंखों में लेकर फांसी के फंदे को चूमा था। अध्‍ययन उनकी न बुझने वाली प्‍यास थी और परिवर्तन का रास्‍ता खोलने के लिए ज्ञान की नई खोज उनका मशीन, जो हर तरह के अन्‍याय को खत्‍म करने के विराट, लक्ष्‍य से जुड़ा था। आइए, आगे बढ़ें और उनके सपनों को मंजिल तक पहुंचाने के लिए अपनी भूमिका निश्चित करें। भगत सिंह के जन्‍म शताब्‍दी-आयोजन के कार्यक्रम को उनके विचार-धारणा-सपनों के अनुरूप घर-घर तक पहुंचाने का जिम्‍मा लें।

भगत सिंह जन्‍म शताब्‍दी समारोह आयोजन समिति, पटना, बिहार

जावेद अख्‍तर खाँ- 09835486721

विनोद कुमार वीनू- 09430253251

1 comment:

  1. It's indeed a matter of great pleasure and pride that our Bihari Bandhu's are reliving the memories of the great legend and paying honour.

    Kudos for your effort and thanks for this great blog.

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